सुरक्षित और समरस भारत : चुनौतियाँ और सुझाव

भारत किसी के लिए सिर्फ एक देश हो सकता है पर  हमारे लिए एक माँ है , माँ क्या कभी अपने बच्चो में भेद भाव कर सकती है क्या? एक माँ के लिए तो हर बच्चा ही प्रिय है, उसका हर बालक ही निराला है, हर शिशु ही अनूठा है क्या कभी कोई माँ भेद भाव कर सकती है?दोस्तों में उस भारत माँ  की बात कर रहा हूँ जो अपने आप में पांच हज़ार साल पुरानी  सभ्यता को लेकर आगे बढ़ रही  है | मित्रो मै उस उस भारत माँ  की बात कर रहा हूँ जिसे  जिसने जितने घाव दिया हर घाव हँसते  हुए सहन कर लिया पर कभी अपने बच्चो को आपस में  भेद भाव नहीं करने दिया |

अगर हम भारत की सभ्यता को जानते हैं तो यह ज़रूर जानते होंगे की हमारे सभ्यता में असमानता के लिए कही जगह नहीं है |  हम सब इससे अवगत है की भारत विविधताओ से भरा हुआ देश है, देश को एक धागे के पिरोकर रखने की लिए सदैव एक ऐसे नेतृत्व  की ज़रूरत रही है, जो सारी विविधताओ में समन्वय स्थापित  कर सामाजिक व्यवस्थाओं  में समरसता  बनाए रखे| इस दृष्टि से मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम सामाजिक समरसता  के प्रतीक हैं| एक साधारण मनुष्य का  जीवन  निर्वहन करते हुए भी श्री राम ने सामाजिक , नैतिक  और राजनैतिक मर्यादाओं का पालन जिस तरह से किया वैसा विश्व साहित्य में कही उपलब्ध नहीं है | कई बार श्री राम के सामने कई ऐसी परिस्थितियाँ उत्त्पन्न हुई जब भगवान् राम ने अपने विवेक से काम लेते हुए हमारे लिए उद्धारण पेश किए|  श्री राम ने  वनवास के दोरान विभिन्न जाती और वर्गों के मध्य परस्पर प्रेम व विश्वास की भावना का संचार किया | निषादराज गुह के यहाँ रूककर उन्हें गले लगाकर सामाजिक समरसता का सन्देश दिया था | शबरी के झूठे  बेर खाकर समाज में प्रेम और विश्वास का परिचय दिया |

भारत के संविधान की प्रस्तावना में समानता का वर्णन  है | भारत का हर व्यक्ति हर क्षेत्र में सामान है | भारत का संविधान मुख्य रूप से किसी भी तरह के भेदभाव को पूर्णत:  गैर संवैधानिक मानता है| समाज को समरस बनाने के स्थिति का सपना अनेक तत्त्वविदों ने हर सामाजशास्त्रियों ने, मनीषियों ने रखा है। महात्मा गांधी ने अहिंसा और सत्य पर आधारित समरस  समाज का सपना देखा। डॉ. बाबासाहब अंबेडकर ने स्वातंत्र्य, समता, बंधुता और न्याय पर आधारित समाज रचना का सपना देखा। श्री गुरुजी गोलवलकर  ने साक्षरता से समाज में समरसता लाने की बात पर ज़ोर दिया | यह सब भारत माता के सपूतो ने अपनी-अपनी दृष्टी से देश के लिए  जो विचार सर्वोच्च हो सकते थे वो हम सबके सम्मुख रखे|

आज बाबासाहेब द्वारा बनाए हुए इस भारत के संविधान की समरसता को विभाजित करने की नापाक साजिश की जा रही है | आज का युग वैश्वीकरण का युग है | एक देश का रहन  सहन दूसरे  देश पर काफी प्रभाव करता है सिर्फ रहन सहन ही नहीं बल्कि कई ऐसे अनावश्यक तत्व वैश्वीकरण का फायदा उठाकर अपना मूल कृत्य करने में  लग जाते हैं | मै यह नहीं  कहता की वैश्वीकरण गलत है पर लोग इसका गलत फायदा उठाने से नहीं चूकते | अंग्रेजी में एक कहावत है “If you want to ruin a nation ruin its culture.if you want to create a divide  ruin its education.” वैश्वीकरण का फायदा उठाकर कई कम्पनी देश की अर्थ व्यवस्था को कमज़ोर करने में सुचारू रूप से लग गई है | मल्टीनेशनल कम्पनियें  छोटे व्यापार  को खा जाती है जिससे समाज में असमानता पैदा होती है यह एक समरस भारत के लिए एक चुनोती से कम नहीं है|

आज कई NGO  समाजसुधार के नाम पर देश को बाटने के अपने घिनोने कृत्य में लगे  है | चाहे वो फोर्ड फाउंडेशन हो या ग्रीन पीस या फिर एमनेस्टी इंटरनेशनल | ये गरीबो का भला करने की आड  में देश को बाटने व देश में देश के दुश्मन पैदा करने के अपने नापाक इरादों को पूर्ण करने में लग जाती है| कई पोलिटिकल पार्टियां आई व गई पर एक मुद्दा हम सबके सामने जेसा का तैसा  ही रहा वो है नक्सलवाद का  माओवाद का, आज भी इस देश को कैंसर को की तरह यह बीमारी खाए जा रही है | आप को लग रहा होगा में इसका जिक्र अभी क्यों कर रहा हूँ , मित्रो ये नाक्सल केसे देश के विपरीत हथियार  उठा लेते हैं? कौन इन्हें पैसा देता है? कौन इन्हें उकसाता है?, कौन इन्हें बरगलाता है? दोस्तों वह कोई और नहीं यह NGO  के तथाकथित बुद्धिजीवी लोग  हैं , यह ऐसे लोग  हैं जो बाबा साहेब के संविधान द्वारा बने इस देश को अस्थिर करने में लगे है! क्या आप और में  यह होता हुआ देख चुप रह सकते हैं क्या?

हम सब इससे अवगत हैं की JNU  में क्या हुआ देश के विभिन्न कैमपसेस  में देश को बाटने की बातें की जाती हैं गाँधी जी जिस भारत को माँ का तर्जा देते थे उस माँ को बाटने की बातें की जाती हैं क्या यह सामाज की समरसता और सुरक्षा के उप्पर घटर नहीं है क्या? जिस वामपंथ की विचार धारा को विश्व ने नकार दिया जिस वामपंथ की किताबो को दुनिया ने अलग कर दिया उन किताबो में से पढ़कर हमारे वामपंथी मित्र देश का माहोल ख़राब करने में लगे हैं | आज जब देश में डिबेट देश की प्रगति और विकास पर होनी चाहिए, तब इन विश्वविद्यालयों के प्रांगणों  में देश के बारें में दुष्प्रचार करने के षण्यंत्र किया जा रहा है यह देश की आखण्डता और सुरक्षा पर हमला नहीं तो और क्या है |

“बाला साहेब देवरस जी ने कहा था की अगर छुआ छूत पाप नहीं है तो कोइ कृत्य पाप नहीं” पर आज समाज में जातियों के बीच में तनाव पैदा करने की पूरी कोशिश करी जा रही है , जिससे एक समरस समाज और एक सुरक्षित समाज की अपेक्षा कभी पूरी न हो पाए | यह पैदा करने की चाह रखने वाली देशविरोधी तागत का सामना करने के लिए हम सबको एकीकृत  होकर इनसे मुकाबला करने की ज़रूरत है|

 हम सब इससे अवगत हैं की भारत का मीडिया सिर्फ और सिर्फ  t r p के लिए किस हद तक गिर सकता है | वह एक छोटे से छोटी चीज़ को तूल टेकर क्या से क्या बना सकता है | मीडिया को भारत का संविधान fourth pillar of democracy कह कर संबोधित करता है पर क्या आज मीडिया अपना काम निभा पा रहा है? मीडिया से हमारी अपेक्षा रहती है की ज़िम्मेदार और  निष्पक्ष रहकर अपना काम करे  मीडिया ट्रायल से बेगुनाह भी गुनाहगार  बन जाता है पर मीडिया इसे फ्रीडम ऑफ़ स्पीच का नाम देकर अपना हाथ साफ़ कर लेती है | आज के समय में मीडिया आग में घी डालने का काम को छोढकर और कुच नहीं कर रही है | एक देश के गुनाहगार को हीरो केसे बनाया जाता है मीडिया उसका जीताजागता उधारण है |

विविधता में एकता भारत की पहचान रही है, भारत की इस पहचान को चोट पहुँचाने के लीए बाहरी ताकतें अलग – अलग तौर पर अपना काम पूरा करने पर लग जाती हैं , चाहे वह हमारे अल्पसंख्यक भाईयों को देश के खिलाफ भड़काना का काम हो या फिर जबरदस्ती  धर्मान्तरण करवाना या फिर देश की ताकत नौजवानों को देश के खिलाफ उकसाने का काम करना यह देश विरोधी ताकतें देश की प्रगति और देश की समरसता को चोट पहुँचाने की हर कृत्य करने की कोशिश करती हैं |

ऐसे देशविरोधी कृत्य, देश की समरसता के साथ साथ यह देश की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा करती हमारी जिम्मेदारी बनती है इनसे हम अपने भारत को सुरक्षित रखें | ऐसे समय मुझे गुरूजी की कही हुई बात याद आती है “एक समरस भारत की कल्पना बिना साक्षरता  के पूरी नहीं है” हम कार्यकर्ताओं को प्रयास करना चाहिए की हम साक्षरता का प्रवाह देश के उन इलाको में करें जो इनसे अभी तक अछूते रहे हैं | शिक्षा ही एक ऐसा शस्त्र है जो इन कुरीतियों से देश की सुरक्षा कर सकता है |

असमानता को मिटाने के लिया सामान आर्थिक  विकास भी कारगर साबित  होगा | हम यहाँ से एक प्रण  ले की भारत के नागरिक  होने का कर्तव्य  का  निर्वहन कर हम  भारत को समरस और सुरक्षित राष्ट्र  बनाएगे |

© Copyright 2015 PPRC